The Oldest Shri Jagannath Mandir in Delhi & NCR - Since 1968

Blogs & Updates !

Take a break and read all about it

सुना वेश 2025: जब सोने में दमकते हैं भगवान जगन्नाथ – त्यागराज नगर में अद्भुत स्वर्णिम दर्शन!

त्यागराज नगर में देखें प्रभु का अलौकिक स्वर्णिम रूप! कल्पना कीजिए: सैकड़ों किलो शुद्ध सोने से जड़े, जगमगाते हुए भगवान, अपने विशाल रथों पर विराजमान! यह कोई स्वर्गलोक का दृश्य नहीं, बल्कि दिल्ली के त्यागराज नगर में होने वाला सुना वेश उत्सव है. यह पर्व रथ यात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ के सबसे भव्य और आकर्षक रूपों में से एक है. 06 जुलाई, 2025 को, श्री जगन्नाथ मंदिर, त्यागराज नगर, एक ऐसे अलौकिक दृश्य का साक्षी बनेगा. यहाँ भक्त अपने आराध्य को स्वर्ण रूप में निहारकर धन्य हो जाएँगे. यह केवल आभूषणों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि भगवान की दिव्य महिमा और ऐश्वर्य का प्रतीक है. आइए, इस स्वर्ण वेश के पीछे की ऐतिहासिक, आध्यात्मिक कहानियों और त्यागराज नगर में इसकी भव्य तैयारी को विस्तार से जानें. सुना वेश: स्वर्ण में लिपटी दिव्यता का दर्शन  ‘सुना वेश’ ओड़िया भाषा के दो शब्दों ‘सुना’ (सोना) और ‘वेश’ (परिधान) से मिलकर बना है.

Read More ...

बाहुड़ा यात्रा 2026: जब भगवान जगन्नाथ लौटते हैं अपने धाम – त्यागराज नगर में आस्था की घर वापसी!

बाहुड़ा यात्रा दिल्ली: लाखों भक्तों संग करें भगवान की भव्य घर वापसी का स्वागत! दस दिनों के प्रवास के बाद, जब अपने प्रिय लौटते हैं, तो कैसा लगता है? एक अनूठा उत्साह, एक अलग ही खुशी और अपनेपन का एहसास! यही भावना दिल्ली के त्यागराज नगर में उमड़ती है. यह वो पल होता है जब भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा अपनी वार्षिक बाहुड़ा यात्रा 2026 पर वापस लौटते हैं. 24 जुलाई, 2026 को, त्यागराज नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में, भगवान की भव्य रथ यात्रा का दूसरा चरण देखने को मिलेगा. यह सिर्फ रथों की वापसी नहीं, बल्कि भक्तों की प्रतीक्षा का सुखद अंत है. साथ ही, यह एक ऐसा पर्व है जो विरह के बाद मिलन का आनंद लाता है. आइए, इस ‘घर वापसी’ यात्रा के महत्व, इसकी परंपराओं और त्यागराज नगर में इसके भव्य आयोजन को गहराई से जानें. बाहुड़ा यात्रा: एक वापसी जो उत्सव बन गई!  ‘बाहुड़ा’ का

Read More ...

हेरा पंचमी 2025: जब प्रेम में रूठती हैं देवी लक्ष्मी – त्यागराज नगर में अनूठा रथ यात्रा उत्सव!

हेरा पंचमी दिल्ली: इस रथ यात्रा उत्सव में देखें लक्ष्मी जी की प्रेम भरी मनुहार! एक तरफ भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा का उल्लास, दूसरी ओर अपनी रूठी हुई प्रिया को मनाने की अनोखी लीला. कल्पना कीजिए, पुरी से दूर दिल्ली के दिल में, एक ऐसा उत्सव जहाँ प्रेम, नाराज़गी और मनुहार का अद्भुत संगम होता है! हम बात कर रहे हैं हेरा पंचमी 2025 की. 01 जुलाई, 2025 को, दिल्ली का श्री जगन्नाथ मंदिर, त्यागराज नगर, एक ऐसी परंपरा का साक्षी बनेगा. यह परंपरा भक्तों को भगवान के मानवीय रिश्तों से गहराई से जोड़ती है. यह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम और नाराजगी की एक मनमोहक गाथा है. आइए, इस अनूठी लीला के पीछे की कहानी, इसका महत्व और त्यागराज नगर में इसके जीवंत आयोजन को विस्तार से जानें. हेरा पंचमी: प्रेम और नाराजगी का अनोखा ताना-बाना हेरा पंचमी रथ यात्रा के पांचवें दिन

Read More ...

नेत्रोत्सव 2025: त्यागराज नगर में भगवान जगन्नाथ का नवयौवन दर्शन!

भगवान जगन्नाथ के नए रूप के पहले दर्शन – नेत्रोत्सव 2025 का खास दिन! क्या आप जानते हैं कि 15 दिनों के एकांतवास के बाद भगवान जगन्नाथ भक्तों को कैसे दर्शन देते हैं? यह किसी रहस्य से कम नहीं! दरअसल, यह एक अद्भुत परंपरा है, जिसे ‘नेत्रोत्सव’ या ‘नव्यौवन दर्शन’ कहते हैं. यह भगवान और भक्तों के बीच के अटूट रिश्ते का एक ऐसा पर्व है, जिसका हर श्रद्धालु बेसब्री से इंतजार करता है. 26 जून, 2025 को, दिल्ली के त्यागराज नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में यह दिव्य उत्सव मनाया जाएगा. देवस्नान पूर्णिमा के बाद 15 दिनों तक एकांत में रहने के बाद, भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा एक नए, युवा रूप में भक्तों के सामने प्रकट होंगे. आइए, इस विशेष दिन के महत्व, इसकी कथाओं और त्यागराज नगर में इसके भव्य आयोजन को विस्तार से जानें. नेत्रोत्सव क्या है? – भगवान का नवयौवन रूप!  सीधे शब्दों में

Read More ...

देवस्नान पूर्णिमा 2025: त्यागराज नगर में भगवान जगन्नाथ का दिव्य स्नान उत्सव!

देवस्नान पूर्णिमा 2025: आस्था, स्नान और अनवसर का रहस्य क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान भी बीमार पड़ते हैं? या उन्हें भी आराम की ज़रूरत होती है? यह बात थोड़ी अटपटी लग सकती है. हालांकि, ओडिशा के पुरी धाम में और दिल्ली के त्यागराज नगर जैसे जगन्नाथ मंदिरों में मनाई जाने वाली देवस्नान पूर्णिमा का यही तो सार है. यह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि एक गहरी आस्था और भगवान के प्रति भक्तों के असीम प्रेम का प्रतीक है. 11 जून, 2025 को, त्यागराज नगर, दिल्ली का श्री जगन्नाथ मंदिर एक दिव्य उत्सव का साक्षी बनेगा. यह है देवस्नान पूर्णिमा! इस दिन भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को सार्वजनिक रूप से पवित्र जल से स्नान कराया जाता है. इसके बाद, वे 15 दिनों के लिए भक्तों के दर्शन से ओझल हो जाते हैं. आइए, इस अद्भुत परंपरा की गहराइयों में गोता लगाएँ और इसके महत्व को जानें.

Read More ...

दिल्ली की 58वीं श्री जगन्नाथ रथ यात्रा 2025: त्यागराज नगर में श्रद्धालुओं का भव्य मिलन

दिल्ली में फिर गूंजेगा ‘जय जगन्नाथ!’ – त्यागराज नगर में 58वीं रथ यात्रा 2025 का महासंगम! 🌼 जैसे ही रथ यात्रा करीब आती है: भक्ति का जोश फिर से जाग उठता है जैसे-जैसे 2025 की रथ यात्रा पास आ रही है, भक्तों का उत्साह बढ़ता जा रहा है। यह सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि भगवान जगन्नाथ की अपने भक्तों के बीच उपस्थिति का उत्सव है। दिल्ली के त्यागराज नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर पिछले 58 वर्षों से इस पावन परंपरा को निभा रहा है। इस साल, हम 58वीं भव्य रथ यात्रा का आयोजन कर रहे हैं। यह मौका न केवल आस्था का है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान का भी उत्सव है। 🕉️ रथ यात्रा का इतिहास: एक परंपरा जो समय को पार कर गई रथ यात्रा की शुरुआत ओडिशा के पुरी से हुई थी, जहाँ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की शोभायात्रा होती है। कहा जाता है कि भगवान जगन्नाथ

Read More ...

वट सावित्री 2025: श्री जगन्नाथ मंदिर, थ्यागराज नगर में शुभ मुहूर्त और परंपरा

🌳 वट सावित्री व्रत 2025: अखंड सौभाग्य का प्रतीक व्रत और उसकी पौराणिक महिमा वट सावित्री व्रत 2025 भारतीय विवाहित महिलाओं के लिए एक अत्यंत पावन अवसर है, जिसे वे अपने पति की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ बड़े श्रद्धा भाव से मनाती हैं। यह व्रत इस वर्ष 26 मई, सोमवार को मनाया जाएगा और इसका विशेष आयोजन श्री जगन्नाथ मंदिर, त्यागराज नगर, नई दिल्ली में किया जा रहा है। इस दिन महिलाएं वट (बरगद) वृक्ष की पूजा कर देवी सावित्री की अमर कथा को याद करती हैं, जिन्होंने अपनी भक्ति और बुद्धिमत्ता से पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस ले लिए थे। वट सावित्री व्रत, भारतीय विवाहित महिलाओं द्वारा रखा जाने वाला एक अत्यंत शुभ व्रत है जो पति की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख-समृद्धि की कामना हेतु किया जाता है। यह व्रत 2025 में 26 मई, सोमवार को मनाया

Read More ...

नरसिंह पूजा 2025 | 11 मई को जुड़ें दिल्ली के सबसे शक्तिशाली उत्सव में

नरसिंह भगवान की पूजा सनातन धर्म के उन पवित्र क्षणों में से एक है जो भक्ति, शक्ति और धार्मिक आस्था का प्रतीक बन चुका है। इस वर्ष यह विशेष पूजा 11 मई 2025 (रविवार) को श्री जगन्नाथ मंदिर, त्यागराज नगर, नई दिल्ली में भव्य रूप से आयोजित की जा रही है। 🔱 नरसिंह भगवान कौन हैं? भगवान नरसिंह, भगवान विष्णु के चौथे अवतार हैं, जिन्होंने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए आधे मानव और आधे सिंह के रूप में अवतार लिया था। उन्होंने राक्षस राजा हिरण्यकश्यप का संहार कर यह सिद्ध किया कि जब भक्त की आस्था अडिग होती है, तो भगवान स्वयं प्रकट होकर उसकी रक्षा करते हैं। यह अवतार धर्म और अधर्म के बीच स्पष्ट अंतर को दर्शाता है। 🛕 पूजा कार्यक्रम और समय – 11 मई 2025 स्थान: श्री जगन्नाथ मंदिर, त्यागराज नगर, नई दिल्ली – 110003 तिथि: रविवार, 11 मई 2025 पूजा एवं अनुष्ठान का

Read More ...

56 भोग 2026 – श्री जगन्नाथ मंदिर, त्यागराज में महाप्रसाद आयोजन

Book Your 56 Bhog Prasad Online 56 भोग, भगवान जगन्नाथ को अर्पित वह दिव्य प्रसाद है जिसमें 56 प्रकार के पारंपरिक व्यंजन शामिल होते हैं। यह अनुष्ठान विशेष अवसरों पर किया जाता है, और इस वर्ष यह आयोजन 29 जून 2026 को स्नान पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्री जगन्नाथ मंदिर, त्यागराज, नई दिल्ली में भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न होगा। 🌾 56 भोग का महत्व क्या है? भगवान जगन्नाथ की नित्य सेवा में 56 भोग अर्पित करने की परंपरा बहुत प्राचीन है। माना जाता है कि भगवान प्रतिदिन आठ पहरों में भोजन करते हैं, और दो दिन के उपवास (रथ यात्रा के पहले) के पश्चात यह विशेष महाभोज उन्हें अर्पित किया जाता है। यह प्रसाद न केवल ईश्वर को अर्पित करने का माध्यम है, बल्कि भक्तों को कृपा और समृद्धि का अनुभव भी कराता है। 📜 इतिहास और परंपरा 56 भोग की परंपरा मूल रूप से पुरी, ओडिशा

Read More ...

चंदन यात्रा 2025 – जगन्नाथ मंदिर त्यागराज, दिल्ली में अनुष्ठान, तिथियाँ और आध्यात्मिक विशेषताएँ

चंदन यात्रा 2025 इस वर्ष 08 मई 2025 से 12 मई 2025 तक, एकादशी से पूर्णिमा के मध्य, श्री जगन्नाथ मंदिर, त्यागराज नगर, नई दिल्ली में आस्था और परंपरा के साथ मनाई जा रही है। गर्मियों के आरंभ में यह पर्व न केवल मंदिर परिसर को पवित्रता और भक्ति से भर देता है, बल्कि श्रद्धालुओं के मन को भी शीतल करता है। हर संध्या, मंदिर परिक्रमा, चंदन लेपन और नौका विहार के आयोजन में भाग लेने वाले सैकड़ों भक्त एक अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं। 🌿 चंदन यात्रा क्या है? चंदन यात्रा, जिसका शाब्दिक अर्थ है “चंदन की यात्रा”, एक ग्रीष्मकालीन उत्सव है जो भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा को गर्मी से राहत देने के उद्देश्य से मनाया जाता है। इस अनुष्ठान में भगवान की मूर्तियों पर चंदन का लेप किया जाता है, उन्हें शीतल पेय अर्पित किए जाते हैं और शाम को उन्हें सजाकर मंदिर परिसर

Read More ...