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Shri Jagannath Mandir, Thyagraj Nagar, Delhi: A Spiritual Oasis

Shri Jagannath Mandir, located in Thyagraj Nagar, Delhi, is a revered temple dedicated to Lord Jagannath, an incarnation of Lord Vishnu. It is a spiritual hub, attracting devotees from all corners of the city and beyond. This sacred place is not only a center of devotion but also a cultural and architectural marvel. History and Significance The Jagannath Temple in Delhi mirrors the sanctity of the original Jagannath Temple in Puri, Odisha. It was established to serve the spiritual needs of the Odia community residing in Delhi while welcoming people of all faiths. Over the years, it has become a beacon of unity, faith, and cultural celebration. Architecture and Design The architecture of the Shri Jagannath Mandir in Thyagraj Nagar is inspired by traditional Odia temple designs. The intricate carvings, majestic idols, and serene ambiance create an environment conducive to meditation and worship. The temple’s towering spire is an architectural

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पहिली भोग: भगवान जगन्नाथ को समर्पित एक विशेष परंपरा

भारत की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं में, धर्म और भक्ति का विशेष स्थान है। इनमें से एक अद्वितीय परंपरा है “पहिली भोग”। यह परंपरा भगवान जगन्नाथ से जुड़ी है और हर साल धनु संक्रांति से मकर संक्रांति तक 30 दिनों तक मनाई जाती है। इस लेख में, हम आपको पहिली भोग की महिमा, इसके धार्मिक महत्व और इससे जुड़ी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। पहिली भोग का धार्मिक महत्व पहिली भोग की परंपरा भगवान जगन्नाथ की दिव्य लीलाओं से जुड़ी है। मान्यता के अनुसार, ‘मार्गशीर्ष’ माह में भगवान जगन्नाथ की पत्नी देवी लक्ष्मी अपने पिता के घर जाती हैं और वहां एक माह तक रहती हैं। इस दौरान, भगवान जगन्नाथ के लिए उनकी माँ यशोदा विशेष भोग तैयार करती हैं। इस भोग को प्रेम और श्रद्धा के साथ भगवान को अर्पित किया जाता है। पहिली भोग में भगवान को जिन व्यंजनों का भोग लगाया जाता है, उनमें

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दिल्ली के श्री जगन्नाथ मंदिर का दर्शन: एक आध्यात्मिक अनुभव

दिल्ली के त्यागराज नगर में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है बल्कि यह आध्यात्मिकता और संस्कृति का प्रतीक भी है। इसे दिल्ली का सबसे पुराना जगन्नाथ मंदिर माना जाता है। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को समर्पित यह मंदिर भक्तों और पर्यटकों को शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कराता है। दिल्ली में श्री जगन्नाथ मंदिर की लोकेशन यह पवित्र मंदिर दक्षिण दिल्ली के त्यागराज नगर में स्थित है, जो INA मार्केट के पास है। यह मंदिर अपने शांत वातावरण और केंद्रीय स्थान के कारण प्रार्थना और ध्यान के लिए आदर्श स्थान है। श्री जगन्नाथ मंदिर दिल्ली का निकटतम मेट्रो स्टेशन मंदिर दिल्ली मेट्रो से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। निकटतम मेट्रो स्टेशन हैं: INA मेट्रो स्टेशन (येलो लाइन और पिंक लाइन): यह मंदिर से सिर्फ 1.5 किलोमीटर दूर है। यहां से मंदिर तक रिक्शा या पैदल आसानी से जाया जा सकता है। साउथ एक्सटेंशन

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Exploring Shri Jagannath Mandir in Delhi: A Divine Abode

Shri Jagannath Mandir, situated in the vibrant locality of Thyagraj Nagar, South Delhi, is a beacon of spirituality and culture. Known as Delhi’s oldest Jagannath Temple, it is dedicated to Lord Jagannath, Balabhadra, and Subhadra. This sacred site attracts thousands of devotees and visitors every year, offering solace and a spiritual connection. Jagannath Temple in Delhi Location Shri Jagannath Mandir is located in Thyagraj Nagar, near INA Market, making it easily accessible for residents and visitors alike. The temple’s central location and serene surroundings provide a perfect ambiance for prayer and meditation. Shri Jagannath Mandir Delhi Nearest Metro Station The temple is well-connected via the Delhi Metro. The nearest metro stations are: INA Metro Station (Yellow Line & Pink Line): Just 1.5 km away, it is a 5-minute auto ride or a pleasant walk. South Extension Metro Station (Pink Line): About 2 km away, offering another convenient option for visitors.

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Anubhuti Re: A Divine Connection with Shri Jagannath Ji

In the bustling heart of New Delhi, devotees are gathering for a truly divine and heartfelt evening at Shri Jagannath Mandir, Thyagraj Nagar. The event, “Anubhuti Re,” is not just a spiritual program but a soul-stirring opportunity for devotees to come together and share their personal experiences and profound moments with Shri Jagannath Ji. This special event, scheduled for 7:00 PM on November 30, 2024, invites everyone to reflect, connect, and rejoice in the glory of Lord Jagannath. Let’s delve deeper into the significance of this event, the spirit of devotion, and the community that celebrates it. Understanding Lord Jagannath: The Lord of the Universe Lord Jagannath, an incarnation of Lord Vishnu, is revered as the Lord of the Universe. His name itself signifies universality—‘Jagat’ (world) and ‘Nath’ (lord). He is worshipped in various forms, but his divine presence at the Shri Jagannath Temple in Puri, Odisha, is globally renowned.

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Tulsi Vivah 2024 at Shri Jagannath Mandir

तुलसी विवाह 2024 का आयोजन इस वर्ष श्री जगन्नाथ मंदिर, त्यागराज नगर, दिल्ली में 15 नवंबर को किया जाएगा। इस दिन का विशेष महत्व हिंदू धर्म में तुलसी माता और भगवान विष्णु के विवाह के रूप में माना जाता है। इसे कार्तिक शुक्ल एकादशी के बाद द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। तुलसी विवाह का महत्व तुलसी विवाह का उल्लेख पुराणों में मिलता है और इसे विवाह का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन तुलसी विवाह का आयोजन करता है या उसमें सम्मिलित होता है, उसे वैवाहिक सुख, परिवार में समृद्धि, और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। तुलसी माता का विवाह भगवान विष्णु के शालिग्राम स्वरूप से संपन्न होता है, जो कि हिंदू धार्मिक परंपरा में बहुत शुभ माना जाता है। श्री जगन्नाथ मंदिर में तुलसी विवाह की विशेषताएं श्री जगन्नाथ मंदिर में तुलसी विवाह के आयोजन में श्रद्धालुओं का बहुत उत्साह होता

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Kartik Purnima 2024

कार्तिक पूर्णिमा 2024 का त्योहार 15 नवंबर को मनाया जाएगा। इसे हिंदू धर्म में विशेष महत्व प्राप्त है और यह कार्तिक मास की पूर्णिमा को आता है। इसे देव दीपावली या त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं, क्योंकि यह दिन भगवान शिव के त्रिपुरासुर का वध करने की स्मृति में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान और दीपदान करने से जीवन में सुख-शांति और पापों से मुक्ति मिलती है। भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, और दान-पुण्य का भी इस दिन विशेष महत्व है। कार्तिक पूर्णिमा का महत्व कार्तिक पूर्णिमा के दिन का महत्व वेदों और पुराणों में वर्णित है। इसे भगवान विष्णु और शिव दोनों का प्रिय दिन माना गया है। मान्यता है कि इस दिन स्नान, पूजा, और दान करने से व्यक्ति के सभी पाप समाप्त हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से गंगा

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Kartik Purnima (कार्तिक पूर्णिमा) 2024

कार्तिक पूर्णिमा 2024 को 15 नवंबर को मनाई जाएगी। इसे हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण त्योहार के रूप में माना जाता है, जो कार्तिक मास की पूर्णिमा को आता है। इस दिन को देव दीपावली और त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व है, और इसे भगवान विष्णु, भगवान शिव, और अन्य देवी-देवताओं की पूजा के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा का महत्व कार्तिक पूर्णिमा का दिन विशेष रूप से पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सभी नदियों का जल पवित्र हो जाता है, इसलिए इस दिन गंगा स्नान, दीपदान, और दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है। यह दिन त्रिपुरासुर का वध करके भगवान शिव के विजय की स्मृति में भी मनाया जाता है, जिसे त्रिपुरारी पूर्णिमा कहा जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के प्रमुख अनुष्ठान गंगा स्नान: इस दिन पवित्र नदियों में

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Bhai Dooj – भाई दूज

भाई दूज भारतीय संस्कृति का एक पावन पर्व है, जो भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह का प्रतीक है। यह दीपावली के दो दिन बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। रक्षाबंधन की तरह ही, भाई दूज का पर्व भी भाई-बहन के रिश्ते की सुरक्षा, स्नेह, और सदा के सहयोग को समर्पित है। भाई दूज की कथा और मान्यता भाई दूज से जुड़ी कई पौराणिक कथाएँ हैं। एक लोकप्रिय कथा के अनुसार, यमराज अपनी बहन यमुनाजी से मिलने उनके घर पहुँचे। यमुनाजी ने अपने भाई का आदर-सत्कार किया और उन्हें भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने अपनी बहन से वरदान मांगने को कहा। यमुनाजी ने वरदान माँगा कि जिस प्रकार आज उनके भाई ने उनके घर आकर भोजन किया, उसी प्रकार हर भाई अपनी बहन के घर भोजन करे और उसकी दीर्घायु हो। तभी से भाई दूज का पर्व मनाया जाता है, और इस दिन भाई-बहन

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Govardhan Puja – गोवर्धन पूजा

गोवर्धन पूजा, जिसे अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है, दीपावली के अगले दिन मनाई जाती है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत को उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा करने की कथा का स्मरण किया जाता है। यह पूजा भक्ति, प्रेम और प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने का प्रतीक मानी जाती है। गोवर्धन पूजा का मुख्य उद्देश्य यह है कि मनुष्य प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखे और भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति से जुड़कर जीवन में सुख-समृद्धि का अनुभव करे। गोवर्धन पूजा की कथा पुराणों के अनुसार, एक बार इंद्र देवता ने अपनी शक्ति का अहंकार दिखाने के लिए गोकुल में मूसलधार बारिश की। भगवान कृष्ण ने गोपों और ग्वालों को इस विपत्ति से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठा लिया। सभी ब्रजवासी गोवर्धन पर्वत के नीचे सुरक्षित हो गए, और इंद्रदेव का अहंकार नष्ट हो गया। तब से, गोवर्धन पर्वत और भगवान कृष्ण की

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